State under Article 12 of the Indian Constitution

 Definition of state under article 12( अनुच्छेद 12 के अंतर्गत राज्य की परिभाषा) 

      Article 12 State of the Indian Constitution

Article 12 राज्य शब्द को परिभाषित करता है इसके प्रावधानों के अनुसार “जब तक प्रसंग से दूसरा अर्थ अपेक्षित ना हो तब तक इस भाग (भाग 3) में राज्य के अंतर्गत भारत की सरकार संसद राज्यों में से प्रत्येक राज्य की सरकार और विधानमंडल और भारतीय राज्य के अंदर यह भारत सरकार के नियंत्रण के अधीन संस्थान व अन्य पदाधिकारी सम्मिलित हैं।”

 Article 12 of Indian Constitution के तहत राज्य में निम्नलिखित शामिल हैं- 

•  भारत सरकार तथा संसद

•  राज्य सरकार तथा विधान मंडल

• सभी स्थानीय प्राधिकारी

•  अन्य प्राधिकारी। 

भारतीय सरकार तथा राज्य सरकार अर्थात कार्यपालिका एवं संसद तथा विधानमंडल अर्थात विधायिका का अर्थ तो अपने आप में स्पष्ट है परंतु स्थानीय तथा अन्य पदाधिकारी विस्तृत व्याख्या वाले शब्द है। 

Article 12 of Indian constitution in Hindi

 स्थानीय प्राधिकारी (Local Authorities) 

प्राधिकारी शब्द का अर्थ है जिन्हें विधि, उपविधि, आदेश, अधिसूचना आदि के निर्माण या जारी करने की शक्ति प्राप्त है ऐसे सभी पदाधिकारी जिन्हें ऐसी शक्ति प्राप्त है वह राज्य की परिभाषा में आते हैं।

स्थानीय प्राधिकरण: सामान्य खंड अधिनियम, 1897 की धारा 3 (31) के अनुसार,

स्थानीय प्राधिकारी शब्द के अंतर्गत नगर पालिकाएँ, जिला मंडल, ग्राम पंचायत, इंप्रूवमेंट ट्रस्ट आदि आते हैं। 

 अन्य प्राधिकारी ( Other Authority) 

‘अन्य प्राधिकारी’ शब्द की न्यायालयों द्वारा बड़ी ही विस्तृत व्याख्या की गई है न्यायालयों के सामने अन्य प्राधिकारी पदावली के संबंध में यह प्रश्न हमेशा ही बना रहता है कि कौन-कौन प्राधिकारी इस पदावली के अंतर्गत शामिल हैं तथा उस संबंध में कौन सा परीक्षण है जिससे यह तय किया जा सके कि यह पदाधिकारी अन्य पदाधिकारी पदावली में शामिल है या नहीं। 

‘Test for being treated as a State’ ( राज्य शब्द की परिभाषा में शामिल होने के लिए क्या कसौटी है) 

इस संबंध में एक बहुत ही महत्वपूर्ण मामला था इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड राजस्थान बनाम मदन लाल AIR 1967 सुप्रीम कोर्ट के मामले मेंं, सुप्रीम कोर्ट ने यह कह कि Article 12 में प्रयुक्त ‘अन्य प्राधिकारी’ में वे सभी प्राधिकारी आते हैं जो संविधान या किसी परिनियम (Statute) द्वारा स्थापित किए जाते हैं जिन्हें विधि, उपविधि आदि निर्मित करने की शक्ति प्राप्त है उनके लिए यह आवश्यक नहीं है कि वह शासकीय प्रभुत्वसंपन्न शक्ति( Sovereign Power) का प्रयोग करते हों। 

रमन्ना शेट्टी बनाम अन्तराष्ट्रीय एयर पोर्ट अथोरिटी ऑफ इण्डिया लिमिटेड AIR 1979 SC कि मामले में इस बात की निर्धारण के लिए कि क्या कोई निगम या एजेंसी अन्य पदाधिकारी शब्द में शामिल हैं या नहीं उच्चतम न्यायालय ने निम्नलिखित कसोटी निर्धारित की है- 

1. उस निकाय का स्त्रोत क्या है अर्थात क्या पूंजी राज द्वारा धारित है? 

2. क्या कार्य की प्रकृति सार्वजनिक महत्व की है यह राज्य से जुड़ी है? 

3. क्या कोई राज्यकीय विभाग उसे हस्तांतरित किया गया है? 

4. क्या उसे एकाधिकार की शक्ति है, जो राज्य द्वारा संरक्षित है? 

टेकराज बनाम भारत संघ AIR 1988 SC के मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा यह अभी निर्धारित किया गया कि संविधान एवं संसदीय संस्थान ( Institute of Constitution and Parliamentary Studies?) 

जो कि रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1965 के तहत रजिस्टर्ड संस्था है, राज्य की अभिकर्ता नहीं है और ना ही राज्य की परिभाषा के अंतर्गत शामिल है, क्योंकि उस पर राज्य का व्यापक नियंत्रण नहीं है ऐसी रजिस्टर्ड संस्था तभी राज्य होगी जबकि व राज्य का कारोबार करती है या राज्य के लोक दायित्व को पूरा करती हो। 

अजय हाशिया बनाम खालिद मुजीब ए आई आर 1981 सुप्रीम कोर्ट के मामले में अभिनिर्धारित किया गया कि सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1998 के अधीन रजिस्टर्ड सोसाइटी केंद्र सरकार की अभिकरण है तथा यह Article 12 के अधीन अन्य पदाधिकारी की परिधि में आती है मामले में यह भी कहा गया है कि निगम या निकाय कैसे सृजित होता है, यह आवश्यक कसौटी नहीं है। यदि कोई निकाय राज्य का अभिकर्ता करता है तो वह Article 12 के अंतर्गत राज्य की परिभाषा में आता है। 

और अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहिये 

 इसी प्रकार यूपी वेयरहाउसिंग कारपोरेशन बनाम विजय नारायण ए आई आर 1980 सुप्रीम कोर्ट के मामले में उत्तर प्रदेश राज्य भंडार निगम को और ओमप्रकाश बनाम भारत संघ ए आई आर 1981 सुप्रीम कोर्ट के बाद में भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन को उच्चतम न्यायालय ने Article 12 में प्रयुक्त ‘अन्य प्राधिकारी’ के अर्थ में राज्य माना है इसी प्रकार इलियास बनाम आईसीएआर 1993 के मामले में भारतीय कृषि शोध परिषद को Article 12 के अंतर्गत राज्य माना गया है।

 यूपी स्टेट कोआपरेटिव लैण्ड डेवलपमेंट बैंक लिमिटेड बनाम चन्द्रभान दुबे AIR 1999 SC के मामले में यह अभिनिर्धारित किया गया  कि, उत्तर प्रदेश की कोआपरेटिव बैंक यद्यपि सोसाइटी एक्ट के तहत कार्य करता है, परन्तु उसका गठन बैंक अधिनियम, 1964 के तहत किया गया है जिसके प्रावधानों से यह स्पष्ट होता है, कि बैंक का संचालन राज्य सरकार के पूर्ण नियंत्रण में है अत: वह Article 12 के तहत राज्य की परिभाषा में आता है। 

बैंक ऑफ इंडिया बनाम ओ. पी. स्वांरकर AIR 2003 SC के मामले में उच्चतम न्यायालय ने निर्धारित किया कि राष्ट्रीयकृत बैंक संविधान के Article 12 के तहत राज्य की परिभाषा में आते हैं। 

 आसाम स्टेट स्माल स्केल इण्डस्ट्रीज कारपोरेशन लिमिटेड बनाम डी. पी. फार्मास्यूटिकल्स AIR 2006 के बाद में उच्चतम न्यायालय ने यह ऐलान किया कि आसाम स्केल इंडस्ट्रीज कारपोरेशन लिमिटेड अनुच्छेद 12 के अर्थों में राज्य है। 

अधिनियम निकाय अनुच्छेद भारतीय था अंतर्गत राज्य है (पंजाब जलापूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड बनाम रणजोध सिंह AIR 2007 सुप्रीम कोर्ट) 

 एमडी भद्र सहकारी एसके नियमिता बनाम प्रेसिडेंट चित्रदुर्ग मजदूर संघ ए आई आर 2006 उच्चतम न्यायालय ने धारित किया है कि सहकारी चीनी फैक्ट्री जोकि कोऑपरेटिव सोसाइटीज अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत है Article 12 के अंतर्गत राज्य नहीं है। 

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